जानिए कैसे हुआ था वीणा, सारंगी और मृदंग का अविष्कार

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veena and sarangi

कैसे हुआ थे सृष्टी का आरम्भ

प्राचीनकाल से भारतीय संस्कृति में वाद्य यन्त्र संगीत की दुनिया में बहुत अहम् रहा है। शास्त्रों के अनुसार सृष्टि का आरम्भ ओम की ध्वनि से हुआ है। ऐसे ही आज हम आपको वाद्य यंत्रो के बारे में कुछ रोचक बात बताने जा रहे है।

वीणा का उदय

वीणा : शिवपुराण के अनुसार, भगवान शिव ने नारदजी की साधना से प्रसन्न होकर उन्हें संगीत कला प्रदान की और नारदजी के लिए भगवान शिव ने वीणा का निर्माण किया। शिव प्रदोष स्त्रोत में लिखा गया है कि जब शिव ने नृत्य करने की इच्छा की तो सरस्वती ने वीणा, ब्रह्मा ने करताल, विष्णु ने मृदंग बजाया और इंद्र ने वेणु बजाय था।

सारंगी की कल्पना कब साकार हुई ?

सारंगी : सारंगी की कल्पना रावणास्त्र तथा रावणहस्त वीणा से हुई है। संगीत शास्त्रों में सारंगी की जानकारी संगीतराज से मिली है। वीणा को ही बाद में सारंगी कहा गया है। पिनाक वीणा में वीणा बजाने वाले की स्थिति ऐसी बन जाती है जैसे कोई धनुषधारी धनुष लेकर बैठा हो।

मृदंग का बदलता स्वरुप

मृदंग : प्राचीन मृदंग तीन भागों में होती थी। एक भाग गोद में रहता था तथा दूसरे दोनों भाग सामने उर्ध्वमुखी रखे जाते थे। फिर मृदंग तीन भागों में बदल गया और बाद में एक गोद वाला और दूसरा खड़ा वाला भाग ही प्रयोग होने लगा। अंत में इसका ऊपर वाला भाग भी हट गया और उसका गोद वाला भाग ही शेष बचा जो की मृदंग या मर्दल के नाम से प्रचलित रह गया।

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