जानिए दीपावली के 5 दिनों का पौराणिक महत्व

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जानिए दीपावली के 5 दिनों का पौराणिक महत्व

हिन्दू धर्म में दीपावली को को बहुत हर्षो उल्लास के साथ मनाया जाता है। यह भारतीय कैलेंडर के अनुसार कार्तिक माष  की अमावस्या को मनाया जाता है। कहा जाता है की यह दिन अंधकार पर प्रकाश और  बुराई पर सच्चाई की जीत का संदेश देता है।  जैसा की हम सभी जानते है दीपावली के 5 दिन को बहुत ही हर्षो उल्लास के साथ मनाया जाता है।  लेकिन क्या आप यह जानते है की इन 5 दिनों का पौराणिक महत्व क्या है और यह अपने जीवन में क्या संदेश लेकर आते है।  आज हम आपको कुछ ऐसे ही अनकहे  रोचक और पौराणिक महत्व बताने जा रहे है।  आईये धन तेरस से शुरू करते है।

धनतेरस                                                                     

धनतेरस दिवाली से दो दिन पहले मनाई जाती है। धनतेरस के दिन सभी अपने घर, दुकान और व्यावसायिक  परिसर को पुर्निर्मित करते है।  धन की देवी के आगमन के लिए सुंदर रंगोली, कुमकुम से पैरो के निशान और कई नई आकृति बनायीं जाती है। पूरी रात दीपक प्रज्वलित करते है।  पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन सोना चांदी के आभूषण और कई अन्य बर्तन खरीदना बहुत ही शुभ माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार कहा जाता है की इस दिन  कुछ भी खरीदने पर माँ लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होता है |dhanteras festival on diwali

शास्त्रों के अनुसार कहा जाता है की इस दिन  धन्वन्तरि का जन्म हुआ था।  इस दिन मृत्यु के देवता यम को पूजा जाता है  और रात को दीपक जलाएं जाते हैं ।

नरक चतुर्दशी

दीपावली से एक दिन पहले को नर्क चतुर्दशी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करने की एक परंपरा है। इसके पीछे पौराणिक कहानी है कि दानव राजा नरकासुर प्रागज्योतीसपुर जो की एक नेपाल के दक्षिण प्रांत के शासक- इंद्र देव को हराने के बाद, अदिति के मनमोहक झुमके छीन लेते हैं और अपने अन्त:पुर में देवताओं और संतों की सोलह हजार बेटियों को कैद कर लेते हैं। नर्क चतुर्दशी के अगले दिन भगवान कृष्ण ने दानव को मार डाला और सभी कन्याओं को आज़ाद कराया। दानव की कैद से मुक्त होने के बाद संतों की सभी सोलह हजार बेटियों ने सुबह जल्दी स्नान किया। इसलिए, सुबह जल्दी स्नान की यह परंपरा बुराई पर दिव्यता की विजय का प्रतीक माना जाता है|Narak Chaturdashi on Diwali

लक्ष्मी पूजन

लक्ष्मी पूजन का दिन सबसे खास माना जाता है। इस दिन सूरज  अपने दूसरे चरण में प्रवेश करता है। इस दिन की सबसे खास बात है की अंधियारी रात होने के बावजूद भी इस दिन को बहुत ही शुभ माना जाता है।  इस दिन प्रज्वलित दीपक पूरे शहर में से रात का अंधकार धीरे-धीरे गायब हो जाता है। ऐसा कहा जाता है कि लक्ष्मी जी दीपावली कि रात को पृथ्वी पर भ्रमण करती है और  समृद्धि व  वैभव के  लिए आशीर्वाद की वर्षा करती है। इस शाम को लोग लक्ष्मी पूजन करते है।  पौराणिक मान्यता के अनुसार  महान संतो के दृष्टांत में भगवान कृष्ण और भगवान महावीर शामिल हैं। यह वह खास दिन  है जब भगवान राम 14 वर्ष के वनवास के बाद माता सीता और लक्ष्मण के साथ  वापस घर लौटे थे।

इसके अलावा एक और खास और अनकही कहानी है | एक छोटा सा लड़का था जिसका नाम नचिकेत था|  वह मानता था कि मृत्यु के देवता यम,अमावस्या की अंधेरी रात के जैसे रूप में काले हैं। लेकिन जब नचिकेत यम से मिला तो वह यम का शांत चेहरा और सम्मानजनक कद देखकर हैरान रह गया। यम ने नचिकेता को बताया की मौत तो अंधेरे के माध्यम से गुजरने के बाद व्यक्ति उच्चतम ज्ञान की रोशनी दिखती है और उसकी आत्मा को परमात्मा से मिलाने के लिए अपने शरीर को बंधन से मुक्त कराती है। तब नचिकेता को सांसारिक जीवन के महत्व और मृत्यु के महत्व का एहसास हुआ। know the mythological significance of Diwali

गोवर्धन पूजा

दीपावली के चौथे दिन को गोवर्धन पूजा के रूप में मनाया जाता है।  इस दिन भगवान इन्द्र ने गोवर्धन वासियो पर क्रोध के कारण गोवर्धन में मूसलाधार बारि करी, भगवान इन्द्र के क्रोध से  बचने के लिए गोवर्धन वासी भगवान कृष्ण के शरण में गए।  तब भगवान ने गोवर्धन पर्वत को अपनी ऊँगली पर उठा कर समस्त गोवर्धन वासियो को भगवान इन्द्र के क्रोध से बचाया।

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भाईदूज

 

भाईदूज का त्योहार भाई और बहन के पवित्र रिश्ते में प्रेम का प्रतिक है।  पौराणिक मान्यताओं के अनुसार जब माँ लक्ष्मी राजा बलि का शरीर छोड़ कर भगवान इंद्र के साथ जाना चाहती थी तब उन्होंने कहा था जहा पर तप, सत्य, पराक्रम’ और ‘धर्म’  होगा में वही रहना चाहूंगी।Bhai Dooj Festival on Diwali

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