एक्जाम्स में 99% मार्क्स लाकर भी यह बच्चा जैन मुनि बनने चला

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हम सभी शिक्षा के उस दौर में से गुजरे हैं जहां पर मार्क्स लाना एक बहुत बड़ा संकट हुआ करता था और उस समय में कोई व्यक्ति अगर 99% मार्क्स ले आता था तो यह माना जाता था कि वह बहुत ही होनहार छात्र हैं लेकिन आज हम आपको एक ऐसे छात्र के बारे में बताएंगे जो 99% मांस खिलाने के बावजूद भी सन्यास लेने की ओर अग्रसर हो गया है अब ऐसा क्यों हुआ है यह हम आपको विस्तारपूर्वक बताते हैं।

जब 12वीं क्लास के नतीजे घोषित हो रहे थे तो उस समय छात्र CA और डॉक्टर बनने के बारे में सोच रहे थे लेकिन हर्शल नामक यह युवक जैन मुनि बनने के बारे में सोच रहा था।  यह बालक बचपन से ही शांति और भगवान के प्रति अपनी आस्था वह बनाए हुए था और इसकी सोच यह थी कि यह पूरे विश्व में शांति की स्थापना करें इसी वजह से इसने जैन धर्म के मुनि बनने के बारे में अपना ध्यान केंद्रित किया।   हालांकि इसके बड़े भाई और बहन अपनी शिक्षा और कार्यों में अग्रसर है लेकिन यह बच्चा एक जैन मुनि बनकर मानव कल्याण की ओर अग्रसर होना चाहता है इसी के चलते सूरत में हुए दीक्षांत समारोह में इसने जैन मुनि बनने के लिए अपना पथ अग्रसर किया।

हम सभी इस बात को सुनने के बाद आश्चर्यचकित रह गए होंगे लेकिन एक तरीके से देखा जाए तो यह बालक हर प्रकार से मानसिक रूप में सुलझा हुआ है उसे यह पता है की किसी भी लक्ष्य की प्राप्ति के लिए आपको धार्मिक आचरण रखना पड़ता है और इसी वजह से यह उस पथ पर अग्रसर हो चला है।हम चाहते हैं कि आप भी अपनी राय इस बारे में प्रकट करें इस बालक द्वारा उठाए गए कदम को आप किस कदर सही या गलत मानते हैं।  कमेंट बॉक्स में इसके बारे में अपनी राय प्रकट करें और बताएं कि यह कदम सही है या गलत।

हम आशा करते हैं जानकारी आपको रोचक लगी होगी और आप इसे अपने मित्रों के साथ अवश्य शेयर करेंगे अपनी राय अवश्य दें क्योंकि यह हमें उत्कृष्ट लेख बनाने में मदद करता है।

Article Source: https://goo.gl/qa3eWy

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